Padhne ka tarika Practical or theoretical?

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Padhne ka tarika kya hai?

padhne ka tarika दोस्तों कहा जाता है की हमारे देश में बहुँत बड़े बड़े ज्ञानी पुरुषों का जन्म हुआ हैं और यह सत्य भी हैं। ज्ञान सबसे मूल्यवान चीज़ हैं। कहा जाता हैं आप से सब कुछ छीना जा सकता हैं पर आपका ज्ञान नहीं।

padhne ka tarika
padhne ka tarika

फिर भी आजकल लोग किताबी ज्ञान के पीछे इतना भाग रहे है की अगर उनसे किताबें दूर कर दी जाएं तो दिमाग खाली डिब्बों जैसा हो जाता हैं। आजकल जिसे देखो बस अंको का तालमेल बैठा रहा हैं चाहे कोई भी exam हो बस आपको कितने % अंक मिले इससे मतलब हैं , फिर चाहे आपको व्यवहारिक ज्ञान कितना है यह कोई देखना ही नहीं चाहता हैं।

दोस्तों आजकल की दुनिया में जो दौड़ लगी है उसके लिए आपको नंबर के साथ – साथ सामाजिक और व्यवहारिक ज्ञान की बहुँत जरूरत हैं।

Theoretical Knowledge  से ज्यादा Practical Knowledge की जरूरत हैं।

आप इतिहास उठा कर देख ले दुनिया को जितने वाले लोग वो है जिन्होंने स्कूल की पढाई कभी पूरी ही नहीं की..!  बिल गेट्स , मार्क जुकेरबर्ग , पता नहीं कितने लोग हैं। मेरा कहने का मतलब यह कतई नहीं है की आप स्कूली शिक्षा छोड़ दो । सब का महत्तव हैं। but आप बस इसी शिक्षा को पकड़ के मत बैठो आपको तो बहुँत आगे जाना हैं और आगे जाने के लिए आपकी Theoretical Knowledge  से ज्यादा Practical Knowledge की जरूरत हैं।

हमारे देश में आज भी 10th में पढ़ने वाले 50% बच्चों को बैंक में account कैसे खोल जाता , ट्रेन का ticket कैसे निकलता हैं , टैक्स क्या है ..? इसे कैसे भरा जाता हैं ..? Vat , Tin यह किस चिड़िया का नाम है यह तो बहुँत लोग है जो यह जानते ही नहीं हैं । इसके पीछे का मुख्य कारण यह है की हम खुद आधे से ज्यादा काम अपने बच्चों को कर के दे देते हैं। पूरी तरह से किताबी ज्ञान और उनका काम जो वो कर सकते है खुद माँ- बाप करके देते हैं तो यह तय है की यह उसके व्यक्तित्व विकास में बाधा हैं।

एक कहानी याद आ गयी जो इस प्रकार हैं :-

एक  बहुँत बड़े विद्वान थे। एक बार वो अपने गाँव से कही बाहर घूमने के मन से निकले। अपने साथ उन्होंने अपनी पुस्तकें भी ले लिया। चलते – चलते जब थक गए तो एक पेड़ की छाया में बैठकर पुस्तक पढ़ने का मन बनाया।

Practical and theoretical

   वे अपनी पुस्तक निकाल कर पढ़ने  बैठ गए , और कुछ ही समय में वहाँ कुछ डाकू आ गए और उस विद्वान् से बोले , “ तुम्हारे , पास जो कुछ भी धन दौलत है हमारे हवाले कर दो वर्ना जान से मार देंगे.! ”

“ मेरे पास कुछ नहीं हैं , सिर्फ यह कुछ पुस्तकें हैं बस।” विद्वान् ने कहा।

डाकूओ के सरदार ने कहा , “ ठीक है तुम यह पुस्तकों को ही हमे दे दो , इसे बेचकर ही कुछ पैसे आ जायेंगे। ”

यह कहकर उन्होंने ने विद्वान् से पुस्तकें छीन ली।

विद्वान् को पुस्तकों के छीन जाने से बड़ा दुःख हुआ और

बोला , “ यह किताबें मेंरे बड़े काम की हैं , जब भी कोई समस्या आती है तो उनके हल के लिए मैं इन्ही पुस्तकों का सहारा लेता हूँ।  यह मेरे बड़े काम की चीज़ हैं। आप इसे बेच भी देंगे तो आपको बहुँत कम पैसे मिलेगा लेकिन यह मेरे काम की चीज़ है और मेरा बड़ा नुकसान हो जायेगा। दया करके मुझे मेरी पुस्तकें लौटा दीजिए । ”

इतना सुनकर डाकुओं का सरदार जोर से हँस पड़ा और बोला , “ ऐसे ज्ञान का क्या फायदा जो किताबें छीन जाने पर याद ही न रहे। लेलो अपनी पुस्तकें बड़ा ज्ञानी बनता हैं। ”

दोस्तों उस ज्ञान के पीछे भागों जो अपनी बुद्धि , मेधा और विवेक से आता  हैं। ऐसे ज्ञान का क्या महत्तव जो हमे आज की शिक्षा न दे बल्कि इतिहास में उलझा रखें।

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